चंडीगढ़9 मिनट पहले

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शहर में स्थित पीजीआई में कई तरह के रोगों का इलाज किया जा रहा है। फाइल फोटो

  • बच्चों को पढ़ाई के अलावा खेलने के लिए बच्चों को एक घंटे से ज्यादा न दें मोबाइल

आज वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे है। कोरोना काल में लोग चिंता, थकान, निराशा के साथ सुसाइडल टेंडेंसी बढ़ी है। जरा-जरा सी बात पर लोगों के बीच आपसी झगड़े की घटनाएं भी बढ़ गई हैं। यह कहना है साइकेट्री डिपार्टमेंट के प्रो. संदीप ग्रोवर का । उन्होंने बताया कि लॉक डाउन के चलते लोग घरों में रहे।

ज्यादा देर तक चारदीवारी में रहने की वजह से खासतौर पर महिलाओं में डिप्रेशन के केस बढ़े हैं। कोरोना का सबसे ज्यादा बोझ महिलाओं पर पड़ा। घर की जिम्मेदारी, बच्चों की पढ़ाई और उनकी सुरक्षा जिम्मेदारी ज्यादा उन पर आन पड़ी। यही वजह है कि महिलाओं में पहले की तुलना में 10 से 20 फीसदी डिप्रेशन के मामले बढ़े हैं।

कई केसों में तो डिप्रेशन से बाहर निकल चुकी महिलाएं दोबारा इसका शिकार हो गई हैं।उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के चलते लोगों की नौकरी गईं, कारोबार ठप हुए। एक तरह से हर तरफ हालात बिगड़ गए । उन्होंने कहा कि मेंटल हेल्थ को दुरुस्त करने के लिए इस पर ज्यादा इंवेस्ट करने की जरूरत है। इसके चलते सुसाइडल आइडिएशन वाले मरीज भी बढ़े हैं।

हेल्थ केयर स्टाफ का स्ट्रेस भी बढ़ा

प्रो. ग्रोवर के अनुसार हेल्थ केयर स्टाफ की पढ़ाई समय पर पूरी न होने क्लासेज न लगने की वजह से उनका स्ट्रेस लेवल बढ़ा है। कई स्टूडेंट्स की थीसिस पूरी नहीं हुई। जिनका कोर्स पूरा होने वाला था वह रुक गया। कोरोना वार्ड में ड्यूटी से उनमें भी डर है। यही वजह है कि उनका स्ट्रेस लेवल बढ़ गया है।

पांच साल से कम उम्र के बच्चों को न दें मोबाइल

प्रो. ग्रोवर ने कहा कि पहले बच्चों को मोबाइल, टैब आदि से दूर रहने की सलाह दी जाती थी। लेकिन इन दिनों पढ़ाई आदि सब कुछ ऑनलाइन हो रहा है। ऐसे में उन्हें इसके इस्तेमाल से रोका नहीं जा सकता। लेकिन पढ़ाई के अलावा बच्चों को मोबाइल आदि पर गेम आदि खेलने के लिए एक घंटे से ज्यादा देर के लिए मोबाइल आदि नहीं दिया जाना चाहिए। पांच साल से कम उम्र के बच्चों को तो मोबाइल हाथ में नहीं देना चाहिए। इससे भी उनकी मेंटल हेल्थ पर विपरीत असर पड़ता है।



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