रोहतक21 घंटे पहले

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  • शहर के कई इलाकों में खुलेआम बिक रहा नशा, पुलिस आंकड़ेबाजी में ही पीठ थपथपा रही

रोहतक शहर की नौजवान आबादी इस समय नशे के कारोबारियों की गिरफ्त में है। नशे के सौदागरों के इलाकों में जिस प्रकार से तस्करी और नशा बेचने का नेटवर्क काम कर रहा है उससे ये कहना गलत नहीं होगा कि ये इलाके नशे की मंडी बन चुके हैं। पुलिस दावे करती है कि तस्करी और नशे की बाजारी रोकने के लिए वो निरंतर और बड़े अभियान चला रही है। आंकड़े जारी किए जाते हैं। लेकिन शहर के कुछ इलाकों में नशे का ये कारोबार बगैर रोकटोक और बेखौफी में चल रहा है।

यहां पुलिस के सारे दावाें और अभियानों की कलई खुल जाती है। नशे के नेटवर्क में अब महिलाएं बड़ी भूमिका में हैं। इन इलाकों में हालात यहां तक पहुंच चुके हैं कि यहां की गलियों में दिन में भी आप जाते हैं तो नशे की सौदागर महिलाएं और उनके गुर्गे ऊंची आवाज लगाकर आपको अपने माल की खासियत बताकर पास बुलाते हैं। दैनिक भास्कर ने आज शहर के इन इलाकों में खुली नशे की मंडी की हकीकत से सीधे रूबरू कराने का फैसला किया है। हमारे संवाददाता ने इस इलाके में जाकर सौदागरों के साथ नशे की खेप का मोल भाव किया। वहां के हालातों को अपने कैमरे में कैद किया। पुलिस की आंखों खाेलने के लिए पूरी कहानी को सामने ला रहे हैं।

पुलिस रिकार्ड में नशे के रेड जाेन एरिया हैं शहर के ये इलाके
पूरे शहर में नशे के सौदागरों का जाल फैला है। पुलिस फाइलों को खंगालें तो पता चलता है कि यूनिवर्सिटी, कॉलेज से लेकर छोटे मोटे शिक्षण संस्थानों के कैंपस तक नशे के ये पैडलर सीधे पहुंच बना चुके हैं। युवा पीढ़ी को नशे की लत लगा रहे हैं। वहीं शहर के कुछ एरिया नशे की मंडी के लिए कुख्यात हो चुके हैं। यहां सीधे दिनदहाड़े नशे के लिए मोल भाव होते हैं, अपने माल की क्वालिटी बताते हुए पैडलर महिलाएं ऊंची आवाजें लगाकर ग्राहकों को बुलाती हैं। पुलिस रिकार्ड के अनुसार ही शहर के करतारपुरा, खोखराकोट, रैनकपुरा, पाड़ा मोहल्ला, इंदिरा कॉलोनी, गांधी कैंप समेत कई इलाके हैं जहां पर आसानी से मादक पदार्थ मिलता है। यहां स्मैक, गांजापत्ती, अफीम, हेरोइन सब मिल जाता है। छोटी से छोटी खेप में नशा पुड़िया में 50 से लेकर 200 व 500 रुपये में यहां बिकता है।

नशे की मंडी से लाइव स्थान : करतारपुरा समय : शाम four बजे
भास्कर टीम मंगलवार को दोपहर बाद बाइक पर करतारपुरा की मेन सड़क पर पहुंचती है। यहां एक नुक्कड़ से ही सड़क के साथ लगते करीबन सभी मकानों के आगे महिलाएं बाहर बैठी हैं। कुछ युवक भी बैठे हैं। बाइक की स्पीड कम कर जैसे ही इधर-उधर देखना शुरू किया हर घर के सामने से गुजरते ही महिलाएं आवाज देती हैं- भाई माल लैणा स कै, बेटा माल तो म्हारा सबतै बढ़िया है आजा। एक मकान के सामने बाइक रोककर भास्कर टीम के सदस्य महिला से बात शुरू करते हैं।

नशा बेचने वाली महिलाओं से बातचीत के अंश

महिला : आजा भाई, आंध्रा का सब तै बढ़िया सामान मिलै गा संवाददाता : मिल जै गा के ताई महिला : हां बेटा मिल जै गा, कितणे का लेणा स संवाददाता : पहले दिखा दो फेर बतावांगे (इसी दौरान महिला ने साथ बैठे युवक को इशारा कर भास्कर टीम को अंदर लेकर जाने को कहा। अंदर दूसरी महिला से उनसे बातचीत शुरू की।) महिला : राम राम जी संवाददाता : जी राम-राम महिला : पहलां पाछै न ए रह लिए थे कै। (महिला का इशारा पिछले मकानों के सामने बैठी दूसरे पैडलर की ओर था।) संवाददाता : बैरा कौणी था आड़ै भी मिलै स। महिला : बढ़िया तो भाई आड़ै ही मिलेगा। कत्ती आंध्रा का चिपड़ा सामान। पाछै आल्ले तो कुछ भी धका दे हैं। संवाददाता – ठीक है तो दिखाओ

महिला : (नशे की खेप दिखाते हुए) लो देखो, हर बार यहीं तै ले जाया करो।
संवाददाता : (गांजा की खेप को कुछ देर देखकर कहता है) भाई यो तो ठीक कोनी लाग्या।
महिला : ठीक यो तो टॉप सै, लेणा स तो ले भाई, ग्राहक तो म्हारे दूसरे बहुत सै, तू नया खिलाड़ी दिखै स।
(हालांकि भास्कर टीम के माल न खरीदने पर महिला ने कुछ भला बुरा कहा। लेकिन टीम के सदस्य बगैर खेप खरीदे ही वापस लौट गए।)

9 महीने में 166 तस्कर हो चुके काबू, इनमें 27 महिलाएं शामिल
जिले में नशे की तस्करी करने वाले गिरोह में महिलाओं की तादाद काफी है। इस वर्ष के 9 महीने में पुलिस ने नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले 166 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें 27 महिलाएं शामिल हैं। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि महिलाएं नशे की खेप को रोहतक तक पहुंचाने के साथ-साथ आसपास के एरिया में भी सप्लाई करती है। नशे की खपत में महिलाएं सबसे बड़ी पैडलर हैं।

पुलिस ने नौ महीने में ये मादक पदार्थ किए बरामद
पुलिस ने इस वर्ष के 9 महीने में नशीला पदार्थ की तस्करी करने वाले 115 लाेगाें के खिलाफ केस दर्ज कर 166 को गिरफ्तार किया है। इनसे दो किलो अफीम, 12 किलो चरस, डेढ़ किलो स्मैक, 429 किलोग्राम गांजापत्ती, साढ़े three किलो हेरोइन बरामद की है। नशे की इन खेप की कीमत करोड़ों रुपए में है।

पूरे प्रयास कर रहे हैं, अब नई टीमें बना मारेंगे छापे
शहर को नशा मुक्त करने के लिए पुलिस की ओर से पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। इन एरिया में कई बार पुलिस सर्च अभियान चला चुकी है। अब फिर इन एरिया को फोकस करते हुए पुलिस की टीमें गठित कर छापेमारी की जाएगी। जिले में नशा तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाने के प्रयास किए जाएंगे। -संदीप खिरवार, एडीजीपी, रेंज रोहतक।



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