रांची/रामगढ़/चतरा31 मिनट पहले

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रामगढ़ के रजरप्पा स्थित छिन्नमस्तिका मंदिर में पूजा से पहले थर्मल स्क्रीनिंग कर लोगों को अंदर प्रवेश दिया गया।

  • सात महीने के बाद सिद्धपीठ रजरप्पा छिन्नमस्तिका मंदिर में पहले दिन कम संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
  • पुजारियों ने सुबह four बजे मंगल आरती की, 6 बजे सुबह से मिली आम श्रद्धालुओं को प्रवेश की अनुमति

कोरोना संक्रमण के कारण लगभग सात महीने तक बंद रहने के बाद राज्य सरकार के अनलॉक 5.zero में मिले छूट के तहत गुरुवार को झारखंड के प्रसिद्ध सिद्धपीठ छिन्नमस्तिका मंदिर का पट आम श्रद्धालुओं के लिए पूजा अर्चना के लिए खोल दिया गया। पहले दिन माता के दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम थी। जिला प्रशासन के पदाधिकारी और छिन्नमस्तिका मंदिर न्यास समिति के लोगों ने कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करने का आग्रह करते देखे गए, वहीं श्रद्धालु भी सावधानी बरतते दिखे। सभी के चेहरे में मास्क था। गर्भगृह में प्रवेश से पहले श्रद्धालुओं के हाथों को हैंड सैनिटाइजर से सैनिटाइज किया गया और थर्मल स्क्रीनिंग भी की गई। मंदिर के पुजारी भी फेस मास्क और हैंड ग्लब्स पहने हुए नजर आए।

इटखोरी के भद्रकाली मंदिर में सोशल डिस्टेंसिंग और अन्य गाइड लाइनों का पालन करते श्रद्धालु।

इटखोरी के भद्रकाली मंदिर में सोशल डिस्टेंसिंग और अन्य गाइड लाइनों का पालन करते श्रद्धालु।

निर्धारित स्थान पर हुई बकरे की बलि
संक्रमण रोकने और भीड़ पर नियंत्रण के लिए जिला प्रशासन चाह रह रही थी कि बकरों की बलि नदियों के आसपास हो, लेकिन पुजारियों ने कहा कि यह पूजा पद्धति के खिलाफ है। स्थानीय पुजारी असीम पंडा ने बताया कि इस बात की जानकारी जिला प्रशासन को देने के बाद निर्धारित स्थल पर ही बलि देने पर सहमति बनी। इसके बाद मंदिर खुलने के पहले दिन कई बकरों की बलि हुई।

गढ़वा के बंशीधर मंदिर में पूजा करते श्रद्धालु।

गढ़वा के बंशीधर मंदिर में पूजा करते श्रद्धालु।

इटखोरी में भी खुला मां भद्रकाली मंदिर
चतरा के इटखोरी स्थित मां भद्रकाली माता की पूजा-अर्चना के लिए मंदिर के पट गुरुवार से खोल दिए गए हैं। यहां देवघर के तर्ज पर ऑनलाइन रजिस्‍ट्रेशन के बाद श्रद्धालुओं को माता के दर्शन की अनुमति दी गई। चूंकि पहले दिन ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन न होने की वजह से सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को मंदिर में दर्शन के लिए प्रवेश कराया गया। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन का पूरी तरह पालन किया गया। श्रद्धालुओं ने मास्क लगाया था, मंदिर में प्रवेश से पहले हैंड सैनिटाइज कराया गया। साथ ही थर्मल स्क्रीनिंग भी की गई।

पहाड़ी मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए नहीं खोले जाने से कई लोग बाहर से ही मत्था टेककर वापस घर लौट गए।

पहाड़ी मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए नहीं खोले जाने से कई लोग बाहर से ही मत्था टेककर वापस घर लौट गए।

राजधानी रांची में मंदिरों के पट बंद
राज्य सरकार ने 6 माह बाद धार्मिक स्थलों को खोलने की अनुमति दे दी है, लेकिन रांची में अभी भी धार्मिक स्थलों पर ताला लगा है। पहाड़ी मंदिर, रातू रोड दुर्गा मंदिर साईं मंदिर सहित दर्जनों मंदिरों का दरवाजा लॉकडाउन की तरह ही बंद है। इक्का-दुक्का भक्त मंदिर खुलने की आस में गुरुवार को सुबह मंदिर तक पहुंच गए, लेकिन दरवाजा बंद देख बाहर से ही मत्था टेक कर वापस लौट गए। पहाड़ी मंदिर के पुजारियों ने बताया कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले को देखते हुए अभी मंदिर नहीं खोला गया है। आज शाम तक मंदिर खोलने पर विचार होगा।

रांची के रातू रोड स्थित मंदिर में पूजा करते पुजारी।

रांची के रातू रोड स्थित मंदिर में पूजा करते पुजारी।

वहीं दुर्गा मंदिर में सुबह में मां भवानी की पूजा अर्चना पुजारियों ने ही की। भक्तों के लिए मंदिर का पट नहीं खोला गया। अधिकतर लोग बाहर से ही मत्था टेक कर चले गए। पहाड़ी मंदिर के सामने स्थित संतोषी मंदिर का दरवाजा खुला हुआ था लेकिन एक भी श्रद्धालु नहीं पहुंचे थे। मंदिर के पुजारी ने बताया कि सुबह से मात्र दो भक्त पूजा करने पहुंचे हैं। वह भी बाहर से ही प्रसाद देकर चले गए।



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