भिलाई20 घंटे पहले

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  • कलेक्टर, पालक संघ और शिक्षा अधिकारियों की बैठक के बाद निर्णय, मिलेगी राहत

निजी स्कूल संचालक अब ऑडिट रिपोर्ट आने तक किसी भी बच्चे का शुल्क नहीं ले सकेंगे। यह आदेश मंगलवार को कलेक्टरेट में कलेक्टर, पालक संघ और जिला शिक्षा अधिकारियों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक के बाद जारी किया गया। पालक संघ का आरोप था कि जिले में संचालित 16 निजी स्कूलों में बच्चों के अभिभावकों को शुल्क जमा करने के लिए दबाव डाला जा रहा है। उन पर कार्रवाई के लिए संघ बुधवार को धरना देने वाला था। इसी धरना को देखते हुए कलेक्ट्रेट में बैठक बुलाई। बैठक के बाद अफसरों ने बताया कि जिले में संचालित 16 निजी स्कूलों में तीन साल से ऑडिट नहीं कराया है। वहीं कोरोना काल में बच्चों के अभिभावकों पर शुल्क के लिए दबाव डाल रहे हैं। इसी वजह से अब निजी स्कूल संचालकों को शुल्क नहीं लेने के लिए पत्र लिखा जाएगा। की शिकायत छत्तीसगढ़ छात्र पालक संघ ने की थी। साथ ही मामले को लेकर आंदोलन की चेतावनी भी दी थी। इस संदर्भ में बैठक बुलाई गई। इसमें संघ के अध्यक्ष नजरुल खान अपने साथियों समेत बैठक में शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने की। इसमें एसडीएम वर्मा, एएसपी रोहित झा, शिक्षा विभाग से सहायक संचालक अमित घोष, एडीपीओ अभय जायसवाल आदि भी शामिल हुए। जिला प्रशासन के साथ पालक संघ के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। अफसरों की समझाइश और कार्रवाई के आश्वासन के बाद छत्तीसगढ़ छात्र पालक संघ ने अपना धरना प्रदर्शन करने का फैसला वापस ले लिया है। संघ ने निजी विद्यालयों के संचालकों पर छात्रों को शुल्क के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था।

ऑडिट रिपोर्ट बनाने के लिए तीन टीम बनाई गई
जिले संचालित 16 निजी स्कूलों की three साल का ऑडिट करने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से तीन टीम बनाई गई है। प्रत्येक टीम में एक सहायक संचालक, ऑडिटर और एक शासकीय स्कूल का प्राचार्य होगा। मामले की जांच करने के बाद उन्हें कलेक्टर को रिपोर्ट सौंपना होगा। इधर शासन के फैसले के बाद अफसरों के मुताबिक संघ ने बुधवार को धरना प्रदर्शन नहीं करने का फैसला किया है।



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