अम्बाला20 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

मदनलाल जिंदल का फाइल फोटो

  • आढ़ती के आरोप थे- उन्हें शेलर के लिए जीरी अलॉट नहीं की, डीएम देसवाल मांग रहे रिश्वत, तंग आकर जान दी
  • अब जांच में पता चलेगा मिलिंग पॉलिसी के तहत कितने राइस मिलर्स को सिक्योरिटी जमा कराकर अलाॅट हुई जीरी

आढ़ती मदन लाल जिंदल के सुसाइड मामले में आत्महत्या के लिए मजबूर करने व पैसा मांगने के गंभीर आरोप झेल रहे डीएम विकास देसवाल का मंगलवार को तबादला हो गया। देसवाल को पानीपत लगाया गया है। बताते हैं कि उन्होंने जॉइन भी कर लिया। उनके स्थान पर पानीपत से कृष्ण कुमार को अम्बाला में लगाया गया है।

हालांकि, यह मामला डीएम के तबादले तक सीमित होता नजर नहीं आ रहा है। आढ़ती मदन लाल ने सुसाइड नोट में लिखा था कि किसी एजेंसी का डिफाल्टर नहीं होने के बावजूद डीएम उन्हें राइस मिल के लिए जीरी की परमिशन नहीं दे रहे हैं। डीएम पर ये भी आरोप है कि उसने दूसरे राइस मिल को परमिशन दे दी। अब पुलिस व विभाग के लिए यह जांच का विषय रहेगा कि मिलिंग पॉलिसी के तहत कितने राइस मिल को सिक्योरिटी जमा कर जीरी अलाॅट की गई है।

मिलिंग पॉलिसी के ये नियम

हरियाणा सरकार की मिलिंग पॉलिसी के तहत धान की मिलिंग के लिए राइस मिल को पहले एक टन धान के लिए मिल को 10 लाख रुपए सिक्योरिटी जमा करानी होती है। उसके बाद अगले प्रत्येक टन के लिए 5-5 लाख रुपए की सिक्योरिटी बढ़ती रहती है। जिस मिल की क्षमता प्रति घंटा एक टन मिलिंग की है उसे अधिकतम four हजार मीट्रिक टन धान दिया जा सकता है। इस प्रति टन मिलिंग कैपेसिटी पर राइस मिल को 50 लाख का पोस्ट डेटेड चेक देना पड़ता है।

50-50 लाख के दो गारंटर के चेक व 50 लाख के चेक गारंटी एक आढ़ती की होनी चाहिए। जिसकी क्षमता दो टन मिलिंग प्रति घंटा है उसे 5 हजार मीट्रिक टन, जिसकी क्षमता three टन की है उसे 6 हजार मीट्रिक टन, जिसकी क्षमता four टन प्रति घंटा अथवा इससे ज्यादा की मिलिंग क्षमता है उसे 7 हजार मीट्रिक टन जीरी दी जा सकती है। इसका एग्रीमेंट स्टांप पेपर पर देना पड़ता है। अम्बाला में 70 राइस मिल हैं जो सरकार के लिए कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) का काम करते हैं। अब जांच एजेंसियों को देखना होगा कि जिन राइस मिलर्स को जीरी दी गई है, उनमें से कितनी सरकार की मिलिंग पॉलिसी पर खरा उतरती हैं।

अधिकारी बिना पैसे लिए काम नहीं करते : बजरंग दास गर्ग

हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने डीएम को जिम्मेदार ठहराकर आढ़ती मदन लाल के परिवार के लिए सरकार से 50 लाख के मुआवजे की मांग की है। बजरंग दास गर्ग ने आढ़ती के परिवार से फाेन पर बातचीत कर दुख जताया। उन्हाेंने आरोप लगाया कि मिलर्स को जीरी पंजीकरण करवाने, जीरी खरीद का उठान कराने के जब तक मिलर पैसे नहीं देते, तब तक सरकारी अधिकारी काम नहीं करते। सरकार को सरकारी खरीद एजेंसियों में जो-जो भ्रष्ट अधिकारी हैं उनकी पहचान करके उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

एसोसिएशन बोलीं- मदन लाल ने उन्हें नहीं बताई ऐसी समस्या

आढ़ती एवं मिलर्स मदन लाल सिंगला ने अपनी परेशानी कभी एसोसिएशन के सामने नहीं रखी। करीब 70 राइस मिल हैं उनके सामने ऐसा कोई और मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, जांच में सब सामने आ जाएगा। राजकुमार सिंगला, प्रधान, अम्बाला राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन

मदन लाल जिंदल ने उन्हें कभी अपनी परेशानी बारे नहीं बताया। इस प्रकार का मामला पहले मंडी में कभी देखने को भी नहीं मिला है। अगर उन्हें कोई परेशान कर रहा था तो ये बात आढ़ती एसोसिएशन के सामने रखनी चाहिए थी। पैसा मांगने बारे उन्हें कुछ नहीं पता है।मक्खन लाल गोयल, कच्चा आढ़ती एसोसिएशन

मैं बीमार था और मुझे इस बारे ज्यादा नहीं पता है। अब यही पता चल रहा है कि उन्हें जीरी की परमिशन नहीं मिलने से वे परेशान थे। ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए था। हालांकि, पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। दुनी चंद, जिला प्रधान, आढ़ती एसोसिएशन

आढ़ती का मंगलवार को अंतिम संस्कार किया गया। अभी किसी और के इस मामले में शामिल होने बारे उन्हें कोई शिकायत नहीं है। आढ़ती का परिवार संस्कार में व्यस्त था और दोबारा उनका बेटा अभी नहीं मिला है। मामले की जांच की जा रही है। रामकुमार, एसएचओ सिटी थाना।



Supply hyperlink

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *