भिलाई2 घंटे पहले

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प्रतीकात्मक फोटो।

यशवंत साहू | अब चुनाव के दिन छत्तीसगढ़ का वोटर दिल्ली या देश के किसी भी राज्य में फंस गया है, तो वहां के बूथ में जाकर भी वोट डाल सकेगा। अब तक उसे अपने रजिस्टर्ड बूथ में जाना ही पड़ता था। मगर बहुत जल्द दूरस्थ जगहों में रहने वाला वोटर अपने क्षेत्र के पसंद के प्रत्याशी को वोट दे सकेगा। इस सिस्टम का नाम रिमोट वोटिंग सिस्टम है। जिसे आईआईटी भिलाई और भारत निर्वाचन आयोग मिलकर बना रहा है। इससे वोटर अपने बूथ से दूर होने के बावजूद अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेगा। अब तक बूथ से दूर होने की वजह से वोटर अपना वोट नहीं डाल पाता था या उसे लंबी दूरी तय करके वोट डालने आना पड़ता था। इन तमाम परेशानियों को देखते हुए आईआईटी भिलाई और केंद्रीय चुनाव आयोग इस पर काम कर रहा है।
इस सिस्टम को 2024 से पहले बना लिया जाएगा। ताकि 2024 में हाेने वाले चुनाव में इसे लागू किया जाए। यह कैसे संभव होगा और कौन-कौन से संसाधन की आवश्यकता होगी‌? इस पर बुधवार को आईआईटी भिलाई में आयोजित प्रेजेंटेशन में चर्चा हुई। इस वेबिनार में उद्योग, शिक्षाविद और पीएसयू के पैनलिस्ट भारत में रिमोट वोटिंग को लागू करने के लिए सुरक्षित नेटवर्किंग टेक्नोलॉजी के विकास के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।बताया गया है कि चुनाव आयोग की मुहर और कानून में बदलाव के बाद ही इस तकनीक का इस्तेमाल होगा। इस नई तकनीक के साथ वोटिंग शुरू करने में अभी 1 से 2 साल का समय लग सकता है। इस सिस्टम को एक्जीक्यूशन के लिए आईआईटी भिलाई के साथ भारत निर्वाचन आयोग काम कर रहा है।

बुधवार को नेटवर्किंग कंपनी सीडीओटी, अरिस्टा नेटवर्क, सिस्को नेटवर्क, जनिपर नेटवर्क, डेल टेक्नोलॉजी, एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया और बीएसएनएल जैसी कंपनियों ने रिमोट वोटिंग में नेटवर्किंग तकनीकों को विकसित करने अपना प्रेजेंटेशन दिया।

इनकी मौजूदगी में रिमोट वोटिंग पर मंथन
आईआईटी भिलाई में आयोजित वेबिनार में चुनाव आयुक्त राजीव कुमार, उपचुनाव आयुक्त आशीष कुंद्रा, छत्तीसगढ़ के एसीएस सुब्रत साहू, आईआईटी भिलाई डायरेक्टर प्रो. रजत मूना समेत अन्य शामिल हुए। प्रो. मूना ने वोट गोपनीयता और सर्वरों को वोटों के हस्तांतरण में पारदर्शिता की आवश्यकता और वोटों की गिनती के संदर्भ में सुरक्षा से संबंधित विषयों को समझाया। उप चुनाव आयुक्त आशीष कुंद्रा ने कहा, मतदान केंद्रों और डेटा केंद्रों में मौजूद विशिष्ट डेटा कनेक्टिविटी को बेहतर करते हुए 2024 तक रिमोट वोटिंग तकनीक पूरी तरीके से बनाने की आशा है।

क्या है रिमोट वोटिंग सिस्टम, उसे आप ऐसे समझें
आईआईटी भिलाई के डायरेक्टर प्रो. रजत मूना ने बताया कि रिमोट वोटिंग सिस्टम एक ऐसी तकनीक है, जो निर्वाचन आयोग सभी मतदाताओं को जोड़ने में मदद करेगा। इस तकनीक के अंतर्गत दूरस्थ मतदाताओं का वोट एक सुरक्षित विधि से संबंधित डाटा क्लाउड सर्वर पर सुरक्षित रखा जाएगा। उदाहरण के तौर पर छत्तीसगढ़ के दुर्ग लोकसभा का वोटर अगर बंगलुरू में फंसा है तो वह बंगलुरू के रिमोट वोटिंग बूथ में जाकर दुर्ग लोकसभा के लिए मतदान कर सकता है। रिमोट वोटिंग बूथ देश में हर जगह होगा। जहां वोटर को वोटर कार्ड व जरूरी जानकारी देनी होगी। जिसके माध्यम से वह वोट डाल सकेगा। इसकी गणना डाकमत पत्र जैसी होगी। चुनाव के वक्त गोपनीयता व सुरक्षित तरीके से टेक्नोलॉजी के माध्यम से निर्वाचन क्षेत्र में ट्रांसफर किया जाएगा।



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