फिरोजपुरएक घंटा पहले

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नवरात्रि में हर दिन मां के अलग-अलग स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है। शनिवार को चैत्र नवरात्रि का पहला दिन है यानी मां शैलपुत्री की अराधना का दिन। मां का यह रूप भक्तों को मनचाहे वरदान का आशीर्वाद देता है। नवरात्रि के पहले दिन घर में कलश स्थापना करने के बाद मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है।

मान्यता है कि इनकी पूजा से चंद्र दोष से मुक्ति भी मिल जाती है। देवीद्वारा मंदिर के पुजारी अंशु देवगन ने बताया कि नवरात्र के दौरान शहर के विभिन्न मंदिरों में पूजा अर्चना की जाएगी जिसको लेकर कोरोना की सावधानियों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। इस बार अधिकतर लोग घरों में ही मां की पूजा करेंगे।

पूजा विधि – सबसे पहले मां शैलपुत्री की तस्वीर स्थापित करें। अगर तस्वीर न हो तो मां दुर्गा की ही प्रतिमा की पूजा करें। हाथ में लाल फूल लेकर शैलपुत्री देवी का ध्यान करें और इस मंत्र का जाप करें ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ॐ शैलपुत्री देव्यै नम:’। मंत्र जाप के साथ ही हाथ में पुष्प मनोकामना गुटिका मां की तस्वीर के ऊपर छोड़ दें। इसके बाद इस मंत्र का 108 बार जाप करें ‘ॐ शं शैलपुत्री देव्यै: नम:’। आरती उतारें और मां शैलपुत्री की कथा सुनें। अंत में भोग लगाकर प्रसाद सभी लोगों में वितरित कर दें।

नवरात्र के दिनों में इन चीजों से करें परहेज

घर में यदि कोई व्यक्ति व्रत नहीं भी रख रहा है तब भी उसके लिए बनने वाला भोजन सात्विक हो। नौ दिनों तक घर में छौंक का प्रयोग नहीं करना चाहिए। नवरात्र में घर के अन्दर लहसुन और प्याज प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।व्यक्ति को दाढ़ी, नाखून व बाल नहीं कटवाने चाहिए। शास्त्रों ने इस कार्य को, नवरात्रों में साफ़ मना किया है। भक्ति वाले दिनों में, मनुष्य को मांस और मंदिरा का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

कल की जाएंगी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा…
नवरात्र पर्व के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। साधक इस दिन अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली।

मां शैलपुत्री के मंत्र

  • ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ओम् शैलपुत्री देव्यै नम:
  • ऊँ शं शैलपुत्री देव्यै: नम:
  • वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।



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