लखनऊ13 घंटे पहले

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यह फोटो लखनऊ में कैसरबाग क्षेत्र की है। यहां रोड पर उड़ती धूल वायु प्रदूषण का बड़ा कारण बन रही है।

  • सरकारी विभाग सबसे ज्यादा शामिल, रोड डस्ट भी वायु प्रदूषण का बड़ा कारण
  • राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई

राजधानी लखनऊ की हवा जहरीली हो रही है। शनिवार को लखनऊ का एक्यूआई लेवल (एयर क्वालिटी इंडेक्स ) 249 हो गया। इस खतरे को भांपते हुए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन ने सतर्कता बरतना शुरु कर दिया है। यही वजह है कि दो दिन के भीतर किसान पथ, सेतु निगम समेत 9 बड़ी निर्माण इकाइयों को नोटिस जारी किया गया है। वहीं, जिला प्रशासन ने नगर निगम समेत 6 विभाग के साथ बैठक कर हवा को शुद्ध रखने की रणनीति तैयार की है।

दरअसल, बीते एक सप्ताह से राजधानी का एक्यूआई का लेवल ठीक था। शनिवार को हवा में पीएम 2.5 की मात्रा में बढ़ने से एक्यूआई खराब स्तर पर आ गया। पर्यावरण विशेषज्ञ इसका प्रमुख कारण वाहनों का धुंआ और खस्ताहाल सड़कों से उड़ने वाली धूल को मानते हैं। तालकटोरा औद्योगिक क्षेत्र में तीन उद्योगों को प्रदूषण के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

प्रदूषण फैलाने में सरकारी विभाग सबसे आगे

सेतु निगम द्वारा शहीद पथ से एयरपोर्ट तक बनवाए जा रहे ओवर ब्रिज और टेढ़ी पुलिया ओवर ब्रिज साइट पर वायु प्रदूषण के मानकों की परवाह नहीं की जा रही है। किसान पथ के निर्माण में भी यही हो रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शहर की प्रमुख सड़कों की धूल और अन्य पार्टिकल्स की जांच करायी है। जांच में पता चला है कि शहर के वायु प्रदूषण में पीएम 10 का 78 प्रतिशत तथा पीएम 2.5 का 66 प्रतिशत रोड डस्ट के कारण हैं। कुछ सड़कों पर एक किमी की एरिया में 100 किग्रा तक धूल पाई गयी है।

पीएम 2.5 बिगाड़ रहा हवा की सेहत

सीपीसीबी की रिपोर्ट की मुताबिक राजधानी की हवा को प्रदूषित करने में सूक्ष्म कण पीएम 2.5 जिम्मेदार है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन जेपीएस राठौर कहते हैं कि धूल उत्सर्जन करने वाली सभी निर्माण इकाइयों को सख्त चेतावनी दी गयी है। मानकों का उल्लंघन करने पर संस्थाओं पर कार्रवाई की जाएगी।



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