लुधियाना18 घंटे पहले

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कोर्ट से बाहर रिहाई ऑर्डर लाती पुलिस।

पुलिस की लापरवाही से 16 दिन जेल काट चुके बेगुनाह युवक के मामले में 17वें दिन कोर्ट में उसे डिस्चार्ज करने के आदेश जारी कर दिए, लेकिन आदेश जेल तक न पहुंचने की वजह से सुमित की रिहाई 17वें दिन भी नहीं हुई। उधर, कोर्ट के ऑर्डर के बाद उसके परिजन सुबह से रात तक जेल के बाहर खड़े हो रिहाई का इंतजार करते रहे, मगर न तो पुलिस ने कोई गंभीरता दिखाई, न ही कोर्ट से ऑर्डर जेल प्रबंधन तक पहुंचा। अब बुधवार को सुमित की रिहाई के लिए दोबारा परिवार को जेल में बुलाया गया है। मंगलवार सुबह ही एसीपी राज चौधरी और एसएचओ डिवीजन three सतीश कुमार ऑर्डर लेने कोर्ट पहुंच गए। वहीं, सुमित का भाई प्रकाश जज विश्व गुप्ता की कोर्ट के बाहर पहुंच गया, जबकि पुलिस जज बलकार सिंह की कोर्ट में पहुंच गई। उन्हें दोपहर करीब 1.10 बजे कोर्ट ने सुमित के डिस्चार्ज ऑर्डर दे दिए। उन्होंने आदेशों की फोटो खींचकर आला अफसरों को भेजी और निकल गए। सुमित का भाई और बाकी परिजन कोर्ट में पुलिस के जवाब का इंतजार कर लौट गए।

उन्हें इत्लाह मिली कि ऑर्डर दे दिए हैं। लिहाजा शाम 7 बजे सुमित को छोड़ दिया जाएगा। इसी खुशी में परिजन 6 बजे ही जेल के बाहर पहुंच गए, जोकि रात 8.30 बजे तक जेल से कई कैदियों को रिहा किया गया, लेकिन सुमित बाहर नहीं आया। परिजनों ने जब इधर-उधर से जांच की तो पता चला कि उसके डिस्चार्ज ऑर्डर जेल में नहीं पहुंचे। इस वजह से उसकी रिहाई में अभी एक और दिन का समय लगेगा।

मां सुबह से राह देखती रही, परिजन रात तक जेल के बाहर बैठे रहे
सुमित की मां सीमा ने बताया कि पुलिस ने उनकी उम्मीद जगाई थी कि मंगलवार को उनका बेटा घर लौट आएगा। सुबह से वो मंदिर में पूजा कर रही थी, कि भगवान की कृपा से वो बेटे को देख सकेंगी। मगर रात होते ही पता चला कि बेटे को नहीं छोड़ा, एक बार फिर उनकी उम्मीदें टूट गईं। अब एक आखिरी उम्मीद है कि बुधवार बेटे की रिहाई होगी।

पुलिस-जेल महकमा सिस्टम पर डाल रहे बात: डिवीजन three के एसएचओ सतीश कुमार ने बताया कि जेल प्रबंधन को कोर्ट की ईमेल की जाती है। इस बारे में कोर्ट से पता चलेगा। वहीं, जेल सुपरिंटेंडेंट आरके अरोड़ा ने बताया कि आदेश जेल में नहीं पहुंचे, इसलिए रिहाई नहीं हो पाई। बाकी इस बारे में सुबह ऑनलाइन सिस्टम चेक करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

ये हैं नियम: कोरोनाकाल में अदालतों के अहलमद (क्लर्क) रिलीज वॉरंट बनवा जज से साइन करा ई-मेल के जरिए जिला सेशन जज को भेजते हैं। वहां से ई-मेल से ऑर्डर प्रोसेस रूम (सुविधा सेंटर) जाता है। यहां से ऑफिशियली ऑर्डर जेल में भेजते हैं। यदि वॉरंट भेजने पर भी आरोपी जेल से नहीं छूटता है तो तकनीकी कारण होते हैं।

  • अगर कोई भी आरोपी रिलीज वॉरंट भेजने के बावजूद जेल से रिहा नहीं किया जाता है या अहलमद जान-बूझकर वॉरंट नहीं भेजे तो यह मामला लीगल कंफिनमेंट (गैरकानूनी तौर पर बंदी) की श्रेणी में आता है। ऐसे में लापरवाही बरतने के आरोपी पर कार्रवाई हो सकती है। -एपी बतरा, पूर्व जिला एडिशनल सेशन जज



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