रोहतक9 घंटे पहले

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विद्यार्थी ताड़का वध का मंचन करते हुए।

  • प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने के कारण नेक कुकारे वाली और कट्‌टे वाली समितियां भी नहीं कर रही रामलीला मंचन

आजादी से पहले अलग-अलग संवादों में नवरात्र से दशहरा तक जिस तरह से रामलीला मंचन का स्वरूप चलता था, उसे ही छोटे पर्दे पर निभाने की कोशिश की है बाल कलाकारों ने। दस दिवसीय ऑनलाइन रामलीला मंचन की शूटिंग 25 सितंबर से ही शुरू हो गई थी। पूरे 12 दिन में 45 बाल कालाकारों ने अलग-अलग संवादों में अभिनय के कई रूप दिखाए।

ऑनलाइन रामलीला को वास्तविक रूप देने के लिए पहली से 5वीं कक्षा तक के बच्चों ने रामायण की चौपाइयां, कठिन डायलॉग और गीत खुद बोले। सीन ठीक नहीं हुआ तो 10-10 बार करने से भी परेशान नहीं हुए। कोरोना में बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए स्कूल प्रबंधन ने भी रामलीला के सभी पात्रों के कॉस्ट्यूमस किराए पर ना लेकर दर्जी से तैयार कराए।

शिक्षकों ने मुकुट तैयार किए। इस तरीके से 10 दिन की रामलीला तैयार की गई। रामलीला के दूसरे दिन बच्चों ने ताड़का वध और सीता स्वयंवर किया। वहीं, दूसरी तरफ प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने के कारण नेक कुकारे वाली और कट्‌टे वाली समितियां भी रामलीला मंचन नहीं कर रही है। दशहरा मनाएं भी या नहीं, इसके लिए प्रशासन से बातचीत करेंगे।

महामारी की वजह से टुकड़ों में की शूटिंग
विद्याश्री इंटरनेशनल स्कूल की निदेशिका डॉ. रिशु सिवाच ने बताया कि ऑनलाइन रामलीला मंचन का सुझाव पुराना आईटीआई ग्राउंड के समीप हुई लाइव रामलीला को देखकर आया। इसके लिए 12 दिन पहले ही विद्यार्थियों और शिक्षिकाओं के साथ तैयारियां शुरू कर दी थी। महामारी की वजह से सभी बच्चों को एक साथ नहीं बुला सकते थे।

रामलीला मंचन तो नहीं किया, 10 दिन तक चलेगा रामायण पाठ
नेक कुकारे वाली रामलीला समिति के प्रधान सीताराम सचदेवा व कोषाध्यक्ष डॉ. महेश मदान ने बताया कि इस बार जिला प्रशासन की ओर से रामलीला करने को लेकर दिशा-निर्देश स्पष्ट नहीं थे। कोरोना का खतरा भी अब बढ़ गया है। रामलीला मंचन करते तो भीड़ जरूर इकट्ठा होती। इससे बचने के लिए ही रामलीला मंचन नहीं कर रहे हैं। सचदेवा ने बताया कि साल 1951 से ही गांधी नगर में रामलीला मंचन का कार्य चल रहा है।



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