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चंडीगढ़11 मिनट पहले

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सेक्टर-39 वॉटर वर्क्स के दौरे पर पहुंची एएफडी की टीम

(राजबीर सिंह राणा) एएफडी एशिया मिशन हेड मिस कलेमेंस और प्रोजेक्ट मैनेजर अंकित तुलस्यान ने मंगलवार को चीफ इंजीनियर शैलेंद्र सिंह के साथ सेक्टर-39 के वाॅटर वर्क्स का दौरा किया। चीफ इंजीनियर और उनकी टीम ने एएफडी टीम को वाॅटर वर्क्स के बारे में विस्तृत जानकारी दी। कॉन्ट्रैक्ट को लेकर भी चर्चा हुई।

कॉन्ट्रैक्ट पहले 10 साल का होगा। फिर ठेकेदार के काम को देखते हुए 5 साल बढ़ाया जाएगा। अगर काम ठीक नहीं रहा है तो पांच साल के लिए दूसरा ठेकेदार टेंडर के जरिए तैनात किया जाएगा। सेक्टर-39 वाॅटर वर्क्स में भाखड़ा नहर का पानी कजौली वाॅटर वर्क्स से छह लाइनों के जरिए पहुंचता है। फिल्ट्रेशन के बाद पानी सेक्टर-12, 26, 32,37, 52 और मनीमाजरा के वाॅटर वर्क्स पहुंचता है।

यहां से शहर के 1.76 उपभोक्ताओं तक पानी सप्लाई किया जाता है। पानी का प्रेशर बढ़ाने के लिए यूजीआर और ट्यूबवेल भी लगाए हुए हैं। एएफडी एशिया हेड को पुराना बना 45 एमजीडी का वाॅटर ट्रीटमेंट प्लांट और नया बना 15 एमजीडी का भी दिखाया गया। नए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का अभी इसे बनाने वाली कंपनी हांडा एंड कंपनी के पास चार साल और रहेगा। नए ट्रीटमेंट प्लांट की लैब भी देखी। एएफडी की टीम बुधवार को कजौली वाॅटर वर्क्स का दौरा करेगी।

बिलिंग और कलेक्शन की जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी…. एएफडी की एशिया हेड और प्रोजेक्ट मैनेजर ने स्मार्ट सिटी ऑफिस में मीटिंग की। इसमें चर्चा हुई कि किस प्रकार का टेंडर होगा। आम नॉर्मल टेंडर होगा जिसमें लोएस्ट वन कंपनी आने पर टेंडर अलॉट किया जाता है या फिर अन्य तरह का। पानी सप्लाई का सिस्टम किस प्रकार का रहेगा।

स्मार्ट सिटी के चीफ जनरल मैनेजर एनपी शर्मा और चीफ इंजीनियर शैलेंद्र सिंह ने कहा कि कजौली से छह लाइनों से सेक्टर-39 वाॅटर वर्क्स तक पहुंचने वाला ईपीसी (इंजीनियर परक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) बेस पर किया जाए। इससे आगे सेक्टर-39 वाॅटर वर्क्स से लेकर सभी वाॅटर वर्क्स के आगे होने वाली सप्लाई, बिलिंग, कैश कलेक्शन, ऑपरेशन एंड मेंटेनेस को डीबीओटी (डिजाइन बिल्ट ऑपरेट एंड ट्रांसफर) बेस पर किया जाए। टेंडर में आने वाले ठेकेदार की ही सारी जिम्मेदारी होगी। वह ही पानी की क्वालिटी देगा, बिल बंटवाएगा और कलेक्शन करेगा।

ठेकेदार को पेमेंट तीन महीने बाद की जाएगी या फिर एडवांस में इस पर एएफडी टीम ने कहा कि बाद में पेंमेंट का सिस्टम ठीक रहेगा। एएफडी की कलेमेंस ने कहा कि प्रोजेक्ट की मेंटेनेंस एंड ऑपरेशन 10 साल की जाए। इसके बाद इसे पांच साल के लिए एक्सटेंड किया जाए। अगर ठेकेदार का काम ठीक है तो किया जाए। काम ठीक नहीं है तो चेंज करना बेहतर होगा। स्मार्ट सिटी के चीफ जनरल मैनेजर और चीफ इंजीनियर शैलेंद्र सिंह ने कहा कि ऐसा ही होना चाहिए।



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