चंडीगढ़5 घंटे पहले

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फाइल फोटो

(ननु जोगिंदर सिंह) इंस्टीट्यूट फॉर माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी (इमटेक) के वैज्ञानिक अब इस तथ्य का पता लगाएंगे कि कोरोनो वायरस हवा के जरिए फैलता है या नहीं। दुनिया भर में इस मसले पर बहस चल रही है, लेकिन किसी भी रिसर्च में ये साबित नहीं हो पाया है कि हवा में ये वायरस कितनी देर तक ठहरता है और कितनी दूरी तक फैलता है।

इसके लिए इमटेक ने पंजाब सरकार के साथ करार किया है। इमटेक के डायरेक्टर पीके खोसला ने इसकी पुष्टि की है। उनका कहना है कि कुछ रेगुलेटरी अप्रूवल का इंतजार कर रहे हैं, जिसके आते ही इस रिसर्च पर काम शुरू कर दिया जाएगा। ये एक मुश्किल टास्क है, लेकिन फिर भी इस तथ्य को परखना जरूरी है कि वायरस हवा में कितने समय तक रहता है और एक मरीज जब सांस लेता है तो कितनी दूरी तक जाता है।

इसकी वजह से फ्रंट लाइन वॉरियर्स को सबसे ज्यादा मदद मिल सकेगी। इमटेक के वैज्ञानिक इसमें सीएसआई सेक्टर-32 के वैज्ञानिकों की मदद भी ले सकते हैं। एयर सैंपलिंग पर अब तक किसी भी देश में रिचर्स नहीं हुई है। भारत ऐसा करने वाला पहला देश होगा।

ऐसे होगा काम

पंजाब के बड़े अस्पतालों के आईसीयू और कोविड केयर सेंटर में इमटेक वैज्ञानिक और रिसर्च स्कॉलर्स पीपीई समेत सभी सुरक्षा इंतजाम के साथ जाएंगे। सभी सेंटर्स से एयर सैंपल लिए जाएंगे। ये स्टडी किया जाएगा कि जब एक मरीज बोलता, खांसता या हंसता है तो कितनी दूर तक हवा में कोविड का असर रहता है।

मशीन की क्षमता सिर्फ एयर सैंपल लेने तक ही रहेगी। ये ध्यान रखना जाएगा कि कहीं सरफेस पर मौजूद वायरस के कण एयर सैंपल में न आ जाएं। एक वैज्ञानिक कहते हैं कि कोविड अस्पतालों में जाना बेशक मुश्किल भरा है, ये करना जरूरी है। काम के दौरान ध्यान रखा जाएगा कि किसी को संक्रमण न हो।

लंबे समय से चल रही है इस पर बहस

कोरोना हवा के जरिए फैलता है या नहीं फैलता, इस पर लंबे समय से बहस चल रही है। दुनिया भर के 237 वैज्ञानिकों की टीम ने कहा था कि ये हवा से फैलता है। हालांकि ज्यादातर ने इसे ठीक नहीं माना, क्योंकि माना जाता है कि कोई भी रेस्पिरेटरी इंफेक्शन बड़ी ड्रॉपलेट्स के संपर्क में आने से ही फैलता है। यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया के वैज्ञानिकों ने भी अपनी स्टडी के जरिए इसके हवा से फैलने का दावा किया है। इसी कारण डब्ल्यूएचओ ने कहा था कि वेंटिलेशन होना चाहिए।



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