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बठिंडा21 घंटे पहले

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  • 2019 में मुहिम चलाने के बावजूद आए थे 300 से अधिक डेंगू मरीज

सेहत विभाग द्वारा जिले में डेंगू-मलेरिया की रोकथाम के लिए वर्तमान में सिर्फ कागजों में ही काम किया जा रहा है। जबकि विभाग द्वारा एंटी लारवा टीम को पिछले 6 माह से कोविड-19 की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं अब डेंगू-मलेरिया की बीमारी शुरू होने पर विभाग ने एंटी लारवा टीम को अब कोरोना के साथ-साथ डेंगू लारवा की चेकिंग की भी जिम्मेदारी सौंप दी है।

ऐसे एंटी लारवा टीम में शामिल कर्मचारियों का कहना है कि विभाग द्वारा उन्हें 23 मार्च से ही क्षेत्र में कोविड-19 मरीजों को सर्च करने व होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों की जांच व अन्य डाटा एकत्र करने की जिम्मेदारी दी गई थी, अब उन्हें कोरोना के साथ डेंगू-मलेरिया की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

पिछले तीन दिन पहले जिले में 146 डेंगू पॉजिटिव मरीजों की पुष्टि हुई थी, वहीं शनिवार को four और नए डेंगू पॉजिटिव केस आने से डेंगू मरीजों की संख्या 150 तक पहुंच गई है। सेहत विभाग द्वारा सिविल अस्पताल में 16 बेड का डेंगू वार्ड तैयार किया गया है। डेंगू वार्ड में इलाज के लिए 9 मरीज दाखिल हैं।

इन मरीजों में अजीत रोड गली नंबर 13 की 25 वर्षीय वीरपाल कौर को पिछले चार दिनों से तेज बुखार से पीड़ित थी, परिजनों ने बुधवार को उसे अस्पताल में दाखिल करवाया। डेंगू टेस्ट करवाया तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई, वहीं सेल भी कम हो गए थे। उन्होंने बताया कि अस्पताल से सिर्फ ग्लूकोज की बोतल ही मिल रही है, बाकी अन्य दवाएं बाहर से ही लानी पड़ रही हैं।

रात्रि समय वार्ड में मच्छर अधिक होते है, ऐसे में इससे निजात पाने के लिए कोई अगरबत्ती आदि का प्रबंध नहीं है। वहीं, बलराज नगर गली नंबर 6 वासी सुशील कुमार ने बताया कि तेज बुखार की शिकायत होने पर सोमवार को डेंगू वार्ड में दाखिल हुए, बुधवार को डेंगू रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

अस्पताल में सिर्फ ग्लूकोज उपलब्ध, बाहर से दवाएं ला रहे मरीज

गुरप्रीत सिंह वासी रामपुरा फूल ने बताया कि वह एक सप्ताह से तेज बुखार से पीड़ित है, नजदीक मेडिकल स्टोर से दवाई लेकर काम चला रहे थे। लेकिन आराम नहीं मिला, तीन दिनों से डेंगू वार्ड में दाखिल है। इसी तरह भारत पेट्रोलियम में हेल्पर के तौर पर तैनात ओमप्रकाश ने बताया कि पिछले four दिनों से तेज बुखार से पीड़ित होने के कारण इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा। जहां डेंगू टेस्ट करवाने पर रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

यहां सिर्फ इलाज में ग्लूकोज ही उपलब्ध है, अन्य सभी दवाएं बाहर से खरीदकर लानी पड़ रही है। रात्रि समय अगर तबियत खराब हो जाए तो खोजने पर भी वार्ड में स्टाफ नर्स व अन्य कोई सेहत कर्मचारी नहीं मिलता। इसी तरह वार्ड में दाखिल अन्य मरीज लाइनपार इलाके से संबंधित है। बता दें कि पिछले वर्ष डेंगू मरीजों की संख्या करीब 300 से अधिक थी और एंटी लारवा स्कीम के तहत 21 मेंबरी टीम काम कर रही थी।

लेकिन वर्तमान में विभाग की एंटी लारवा टीम में मात्र 16 कर्मचारी तैनात किए गए है। जिससे डेंगू के सीजन में टीमें डेंगू प्रभावित एरिया में नहीं पहुंच पातीं। पानी खड़ा रहने, स्प्रे न होने और लोगों में अवेयरनेस न होने से डेंगू का डंक बढ़ता है। पहले सेहत विभाग डेंगू के सीजन में कांट्रेक्ट पर स्प्रे टीम, सीएचसी और पीएचसी से मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर, हेल्थ इंस्पेक्टर लगाकर काम चला रहा था, लेकिन इस बार कोरोना के चलते ज्यादातर कर्मियों की ड्यूटी कोविड में लगा दी गई है।

इससे इस सीजन में सर्वे और अवेयरनेस मुहिम न चलने से लोग डेंगू की चपेट में आ रहे हैं। बता दें कि एंटी लारवा स्कीम के तहत यह टीम बनने पर पूरे सीजन में एरिया वाइज सर्वे और डेंगू मच्छर का लारवा नष्ट करना होता है और समय पर उस एरिया में स्प्रे करवाया जाता है। वहीं सेहत विभाग की सिफारिश पर नगर निगम द्वारा शहर के विभिन्न वार्डों में शुक्रवार से फॉगिंग शुरू कर दी गई है, लेकिन विभिन्न गली मोहल्लों में खाली प्लाटों में जमा गंदे पानी में काले तेल का छिड़काव और लोगों को अवेयर करने की भी जरूरत है।

मरीजों को परेशानी नहीं आने देंगे : डाॅ. संधू

सिविल सर्जन बठिंडा डाॅ. अमरीक सिंह संधू ने बताया कि जिले में लोगों को डेंगू-मलेरिया संबंधी जागरूक करने के लिए एंटी लारवा टीम में 16 कर्मचारी शामिल है। जिन्हें अलग-अलग ब्लाकों में सर्वे व लोगों को जागरूक करने के लिए तैनात किया गया है। इसके साथ ही उक्त टीम क्षेत्र में कोविड-19 का भी काम देख रही है।

उन्होंने बताया कि सिविल अस्पताल में डेंगू मरीजों के इलाज के लिए 17 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। जहां दाखिल कर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। वहीं सरकारी अस्पताल व अन्य सेहत केंद्रों पर डेंगू व मलेरिया का पूरा इलाज मुफ्त है। फिलहाल मरीजों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं आने दे जाएगी।



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