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गोंडा27 मिनट पहले

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यह फोटो गोंडा की है। शनिवार को पुलिस ने इस प्रकरण का खुलासा करते हुए गिरफ्तार सात आरोपियों को जेल भेज दिया।

  • 10 अक्टूबर की रात रामजानकी मंदिर के पुजारी सम्राट दास को गोली मारी गई थी, लखनऊ में चल रहा इलाज
  • इटियाथोक पुलिस ने इस प्रकरण में 9 लोगों को आरोपी बनाया, सात लोगों को गिरफ्तार कर भेजा गया जेल

उत्तर प्रदेश के गोंडा में सात दिन पूर्व श्रीराम जानकी मंदिर के पुजारी पर हुए कातिलाना हमले का इटियाथोक पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस के अनुसार, पुजारी सम्राट दास पर हमला एक षडयंत्र का हिस्सा था। इसके लिए मुन्ना सिंह नाम के प्रोफेशनल शूटर को बुलाया गया था। इस षडयंत्र में मंदिर का महंत भी शामिल था। पुलिस ने इस प्रकरण में सात आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। पुजारी का इलाज लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में चल रहा है। उसे भी ठीक होने के बाद गिरफ्तार किया जाएगा।

घायल पुजारी सम्राट दास व मंदिर।

घायल पुजारी सम्राट दास व मंदिर।

जानिए, यह था मामला

इटियाथोक थाना क्षेत्र के तिर्रेमनोरामा स्थित श्रीराम जानकी मंदिर में सो रहे पुजारी सम्राट दास को 10 अक्टूबर की रात गोली मारकर घायल कर दिया गया था। इस संबंध में मंदिर के महंत ने तिर्रेमनोरामा के रहने वाले मुकेश सिंह, भयहरण सिंह, अमर सिंह, दरोगा सिंह को नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। महंत सीताराम दास ने तहरीर में अमर सिंह को मुख्य आरोपी बनाया था। कहा था कि अमर सिंह मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जा करना चाहता है।

120 बीघा जमीन का विवाद था, प्नधानी चुनाव की रंजिश भी

एसपी शैलेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि तिर्रेमनोरामा में 120 बीघा श्रीराम जानकी मन्दिर की जमीन है। जिसको लेकर महंत सीताराम दास व अमर सिंह के बीच पूर्व से विवाद चल रहा है। इसके अलावा मौजूदा प्रधान विनय सिंह व अमर सिंह के बीच प्रधानी की चुनावी रंजिश भी चल रही है। महंत सीताराम दास और विनय सिंह ने मिलकर प्लान बनाया कि यदि किसी तरह अमर सिंह को किसी मामले में फंसाकर जेल भिजवा दिया जाए तो दोनों का रास्ता का साफ हो जाएगा।

इसी बात को लेकर मुन्ना सिंह, विपिन द्विवेदी उर्फ छोटू, नीरज सिंह, सोनू सिंह, वृंदारण त्रिपाठी उर्फ सीताराम दास, शिवशंकर सिंह, विनय कुमार सिंह, सूरज सिंह उर्फ विश्वजीत सिंह और पुजारी सम्राट दास उर्फ अतुल त्रिपाठी एक महीने पूर्व से ही षडयंत्र रचने लगे। जिसमें सभी की सहमति से यह तय हुआ कि पुजारी सम्राट दास को इस तरह से गोली मारी जाए, कि उनकी जान भी न जाए और गोली लग जाए। 10 अक्टूबर की रात मुन्ना सिंह, सोनू सिंह व नीरज सिंह रात में करीब डेढ़ बजे मंदिर के पीछे पहुंच गए। जहां महंत सीताराम दास व पुजारी सम्राट दास मिले। दोनों की सहमति से मुन्ना सिंह ने सम्राट दास को गोली मार दी। इसके बाद महंत सीताराम दास जाकर कमरे में सोने का नाटक करने लगा।



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