जामताड़ाएक घंटा पहले

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ग्रामीणों ने बताया कि विभाग की लापरवाही के कारण भालू किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सकता है।

  • भालू का रेस्क्यू न होने से ग्रामीणों में रोष, भालू के जान पर भी आफत
  • भालू का खेल दिखाने के लिए आने वाले मदारी द्वारा बांधे जाने की आशंका

फतेहपुर प्रखंड के दूधानी गांव में पिछले दो दिनों से एक भालू पेड़ से बंधा हुआ है। ग्रामीणों की ओर से वन विभाग को सूचना दिए जाने के बाद भी कोई कार्रवाई अब तक नहीं हो सकी है। भालू के कारण फतेहपुर क्षेत्र के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है जबकि भालू पर भी जान का खतरा मंडराने लगा है। ग्रामीणों के अनुसार रविवार को कोई अनजान व्यक्ति शायद भालू का खेल दिखाने के लिए क्षेत्र में आया था। रात को जाने के कारण स्थानीय विद्यालय भवन के पीछे पेड़ के नीचे भालू को बांधकर रख यहां से फरार हो गया। सुबह जब बच्चे विद्यालय प्रांगण में खेलने पहुंचे तो देखा कि पेड़ के सहारे भालू बंधा हुआ है।

इस बात की सूचना बच्चों ने गांव के बड़े लोगों को बताया कि विद्यालय के पीछे पेड़ से भालू बंधा हुआ है मगर भालू का मालिक कोई मौजूद नहीं है। जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो भालू के मालिक की काफी खोजबीन की मगर कुछ भी पता नहीं चल सका। ग्रामीण काफी देर तक भालू के मालिक की खोजबीन की मगर सोमवार शाम तक कोई नहीं आया।

ग्रामीण काफी देर तक भालू के मालिक की खोजबीन की मगर सोमवार शाम तक कोई नहीं आया।

ग्रामीण काफी देर तक भालू के मालिक की खोजबीन की मगर सोमवार शाम तक कोई नहीं आया।

विभाग के पदाधिकारियों ने कहा- पिंजरा लाने जा रहे हैं
वन विभाग को ग्रामीणों द्वारा मंगलवार को जानकारी दी गई। सूचना पाकर वन विभाग के अधिकारी पहुंचे। वन विभाग के पदाधिकारी ने ग्रामीणों को बताया कि पिंजरा लाने जा रहे हैं ताकि भालू को ले यहां से ले जाया जा सके। ग्रामीण मंगलवार रात भर वन विभाग के अधिकारियों का आने का इंतजार करते रहे मगर कोई नहीं पहुंचा।

ग्रामीणों ने बताया कि विभाग की लापरवाही के कारण भालू किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सकता है। विभाग के लापरवाही का आलम यह है कि 2 दिन पूर्व सूचना दिए जाने के बाद भी विभाग के अधिकारियों द्वारा भालू का रेस्क्यू नहीं किया और न ही उसके खाने-पीने का इंतजाम ही किया गया। ग्रामीणों ने कहा कि जब इस प्रकार के बड़े मामले की सूचना पर विभाग कोई कार्रवाई नहीं करती है तो लोगों का भरोसा प्रशासन से उठने लगता है। बुधवार की शाम तक भालू के रेस्क्यू के लिए कोई पदाधिकारी नहीं पहुंचा था।



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