• Hindi Information
  • Native
  • Bihar
  • BJP JDU LJP In Bihar Election 2020 Information Replace; 10 Seats Voters Evaluation On Nitish Kumar And Chirag Paswan Occasion

पटना19 मिनट पहलेलेखक: शालिनी सिंह

  • कॉपी लिंक

भास्कर डिजिटल इन 10 सीटों की एनालिसिस से बता रहा है कि अगर वोटिंग ट्रेंड नहीं बदला तो जदयू के लिए संकट बढ़ेगा।

  • वोटर्स ने एनडीए की जगह भाजपाई आधार पर जताया भरोसा तो लोजपा को लाभ तय
  • भाजपा कर रही बागियों पर कार्रवाई, मगर सीट पर आधार वोट का ट्रेंड कुछ और कह रहा

लोजपा जैसे जदयू की सीटों पर प्रत्याशी को फोकस कर रही और जिस तरह उसने भाजपा-जदयू के बागियों को टिकट दिया है, उससे जदयू के भविष्य पर सवाल उठ रहा है। यह सवाल कितना वाजिब है, इसे समझने के लिए भास्कर ने रैंडम 10 सीटों का पूरा गणित समझा तो सामने आया कि इन सीटों पर वोटिंग का पुराना ट्रेंड रहा तो जदयू संकट में रहेगा।

मतलब, भले ही भाजपा-जदयू ने बागियों पर कार्रवाई की, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला क्योंकि भाजपा से लोजपा में गए प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पहचान भाजपाई के रूप में ही अब भी स्थापित है। ऐसे में पुराना वोटिंग ट्रेंड कायम रहा और पार्टी के आधार वोट इस पहचान से जुड़े रह गए तो जदयू प्रत्याशियों वाली एनडीए की सीट पर संकट तय है। पढ़िए, क्यों और कैसे सामने आ रही यह स्थिति-

  • अमरपुर सीट
  • 2015 47.89% वोट जदयू और 40.24% भाजपा
  • 2010 40.78% वोट जदयू और 25.25% राजद

इस सीट पर जदयू ने जयंत राज को उतारा है। पुराने ट्रेंड को समझने के लिए यहां 2015 में जदयू को मिले 47.89% वोटों में से राजद को 2010 में मिले 25.25 % वोट को हटा दें तो जदयू के पास केवल 22 % के आसपास वोट दिखता है। भाजपा के खाते में 2015 में आए 40% वोट एनडीए के खाते में नहीं आए तो जदयू की जीत मुश्किल है।

  • बेलहर सीट
  • 2015 34.32% वोट भाजपा और 44.59% जदयू
  • 2010 28.07% वोट जदयू और 21.74% राजद

यह जदयू की जीती सीट है, लेकिन इस बार वह राजद के साथ नहीं, भाजपा के साथ है। उसे 2015 में यहां लगभग 45 % वोट मिले थे, लेकिन इसमें से अगर राजद के 2010 के लगभग 22 % वोटों को निकाल दिया जाए तो जदयू के पास केवल 22 % के आसपास ही वोट है। ऐसे में भाजपा के 34 % वोट का साथ ही उसकी नैय्या पार लग सकती है, वरना भंवर है।

  • दिनारा सीट
  • 2015 42.98% वोट जदयू और 41.19% भाजपा
  • 2010 39.22% वोट जदयू और 25.41% राजद

2015 में जदयू जीती थी, लेकिन तब राजद का भी साथ था। 2010 में राजद को यहां 25 % वोट मिले थे और इस तरह से 2015 के नतीजों को देखें तो मात्र 17 % वोट ही यहां जदयू का अपना है। ऐसे में यहां उसे जीतने के लिए भाजपा के 41 % वोटों की जरूरत होगी। लेकिन, मुश्किल है कि 2015 के भाजपा उम्मीदवार राजेन्द्र सिंह कमल की खुशबू के साथ लोजपा के बंगले में हैं। यह सीट तो फंसी साफ दिख रही है।

  • एकमा सीट
  • 2015 35.32% वोट जदयू और 29.53% भाजपा
  • 2010 53.87% वोट जदयू और 25.51% राजद

यहां भी जदयू के लिए अकेले नैय्या पार करना मुश्किल है। 2015 में जदयू को यहां 35% वोट मिले, इसमें अगर 2010 में राजद के हिस्से आए वोटों को निकाल दें तो जदयू के पास यहां 10% आधार वोट नजर आता है। यहां भाजपा के हिस्से आईं लगभग 30% वोटों का ही जदयू को सहारा है। मतलब, भाजपा के वोट को लोजपा की तरफ खिसकने से रोकना ही एकमात्र उपाय है।

  • नोखा सीट
  • 2015 51.62% वोट राजद और 35.31% भाजपा
  • 2010 33.44% वोट भाजपा और 23.39% राजद

यहां जीतने वाले महागठबंधन के राजद प्रत्याशी को 2015 में 51% वोट मिले थे। 2010 में इसी सीट पर राजद को अकेले लगभग 24% वोट मिले थे। मतलब, 2015 में मिले 28% वोट जदयू के थे। अब 35% भाजपाई वोट नही जुड़े तो जदयू यहां मुश्किल में होगी।

  • झाझा सीट
  • 2015 40.04% वोट भाजपा और 26.55% जदयू
  • 2010 38.74% वोट जदयू और 30.52% राजद

झाझा की सीट पर 2015 में राजद के साथ होने के बाबजूद जदयू जीत नही पाईं थी। 2010 में इस सीट पर जदयू को 38% और राजद को 30% वोट मिले थे। 2015 के चुनाव में जब ये दोनों पार्टियां जुड़ीं तो वोट भी जुड़ना चाहिए था, लेकिन ऐसा नही हुआ। महागठबंधन के जदयू प्रत्याशी को तब यहां केवल 27% वोट मिले और भाजपा-लोजपा को 40 प्रतिशत। निवर्तमान विधायक लोजपा से उतरे हैं तो जदयू के लिए भाजपा के वोट को अपने पाले में लाना असंभव-सा दिख रहा है।

  • राजपुर सीट
  • 2015 जदयू 47.96% वोट और 29.28% भाजपा
  • 2010 जदयू 39.76% वोट और 28.07% लोजपा

जदयू की मुश्किल तो 2010 के नतीजों को देखकर समझा जा सकता है। यहां 2010 में भाजपा के साथ जदयू को लगभग 40% वोट मिले थे। लोजपा को राजद के साथ 28% वोट मिले थे। 2015 में भाजपा को यहां 29% वोट मिले। अगर इस 29% को हम जदयू को मिले 2010 के वोट से निकाल दें तो जदयू के पास महज 10% ही आधार वोट बचता है। इसबार इस 10% में भाजपा का वोट नहीं जुड़ा तो उसके लिए यह सीट जीतना असंभव-सा है।

  • धौरेया सीट
  • 2015 जदयू 44.41% वोट और 28.83% रालोसपा
  • 2010 जदयू 35.71% वोट और 28.31% राजद

यहां 2015 में जदयू तो 44% वोट मिले थे और राजद को 2010 में यहां 28% वोट मिले थे। 2015 के 44 % से अब हम राजद के 28% वोट को अलग कर सकते हैं क्योंकि अब जदयू और राजद साथ नहीं। इस तरह इस सीट पर जदयू का अपना वोट महज 16% है। लोजपा का फैक्टर काम किया तो जदयू के लिए जीत मुश्किल है।

  • अगिआंव सीट
  • 2015 जदयू 40.03% वोट और 28.77% भाजपा
  • 2010 भाजपा 31.68% वोट और 25.99% राजद

अगिआंव में जदयू को 40% वोट मिले थे। राजद को यहां 2010 में लगभग 26% वोट मिले। इस तरह जदयू का अपना आधार वोट करीब 14% है। उसे जीत के लिए भाजपा के 28.77% वोट की जरूरत होगी, लेकिन इस वोट में तब भाजपा के साथ रही लोजपा का भी कुछ हिस्सा है। ऐसे में जीत यहां भी जदयू के लिए ही मुश्किल है।

  • सुल्तानगंज सीट
  • 2015- जदयू 40.94% वोट और 31.87% रालोसपा (एनडीए)
  • 2010- जदयू 28.05% वोट और 24.13% राजद

इस सीट पर 2015 में जदयू को लगभग 41% वोट मिले थे। इसी सीट पर राजद को 2010 में 24.13% वोट मिले थे। इस तरह अगर जदयू के अपने वोट का प्रतिशत निकालें तो यह करीब 16% होता है। 2015 में यहां भाजपा का वोट रालोसपा को मिला था। रालोसपा का आधार वोट स्पष्ट नहीं, लेकिन बड़ा आधार भाजपा का हुआ और वह इस बार एनडीए को नहीं मिलकर लोजपा के पास गया तो मुश्किल होगी।

एकमुश्त वोट प्रतिशत भी दिखा रहे जदयू की राह के रोड़े

एकमुश्त वोट प्रतिशत को देखें तो भी लोजपा में भाजपाइयों के प्रवेश के साथ जदयू मुश्किल में दिख रहा है। अक्टूबर 2005 में हुए चुनाव में जदयू को कुल वोटों में 20.46% वोट मिला था, जो 2010 के विधानसभा चुनाव में 22.58 % हो गया। उस समय भाजपा और जदयू दोनों साथ थे। 2015 चुनाव में जब जदयू ने महागठबंधन के साथ 100 सीटों पर चुनाव लड़ा तो उसका वोट प्रतिशत घटकर 16.83% हो गया। तीनों ही बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नीतीश कुमार ही रहे, लेकिन 2015 के चुनाव में उनकी पार्टी को सबसे कम वोट मिला था।

फिर 2019 के लोकसभा चुनाव में वह एनडीए का हिस्सा थे तो उनका वोट प्रतिशत बढ़कर 21.81% हो गया। साफ है जब-जब जदयू और भाजपा साथ रहे, जदयू के वोट प्रतिशत में इज़ाफा हुआ। ताजा परिस्थितियों में अगर लोजपा का धुंध जदयू-भाजपा की दोस्ती से नहीं हटा तो जदयू को नुकसान होना तय है।



Supply hyperlink

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed