पटना13 घंटे पहले

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मुकेश की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) विधानसभा चुनाव में एनडीए का हिस्सा होगी।

  • विकासशील इंसान पार्टी का रजिस्टर्ड चुनाव चिह्न नहीं होने के कारण उसके उम्मीदवार भाजपा के चिह्न पर उतरेंगे

तीन दिन पहले महागठबंधन से अलग होने वाले मुकेश सहनी अब एनडीए में शामिल हो गए हैं। मुकेश की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) विधानसभा चुनाव में एनडीए का हिस्सा होगी। भाजपा मुकेश सहनी को 6 सीटें देगी। अब भाजपा 115 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। विकासशील इंसान पार्टी का रजिस्टर्ड चुनाव चिह्न नहीं होने के कारण उसके उम्मीदवार भाजपा के चिह्न पर उतरेंगे।

खुद को सन ऑफ मल्लाह कहने वाले मुकेश सहनी चुनाव में एनडीए को कितना फायदा दिला पाते हैं इसकी परीक्षा होनी अभी बाकी है। सहनी राज्य के राजनीतिक क्षितिज पर 2014 के लोकसभा चुनाव में उभरे थे। बाद में पार्टी बनाई। 2019 का लोकसभा चुनाव महागठबंधन के तहत उनकी पार्टी लड़ी। सहनी खुद खगड़िया लोकसभा क्षेत्र से लड़े और हार गए। सिमरी-बख्तियारपुर उप चुनाव को छोड़कर उनकी पार्टी कभी अकेले चुनाव नहीं लड़ी। इस उपचुनाव में वीआईपी के दिनेश निषाद तीसरे स्थान पर थे जिन्हें 25,225 वोट मिले और तीसरे स्थान पर रहे।

लोकसभा चुनाव में मुकेश सहनी खगड़िया संसदीय सीट के हसनपुर, सिमरी-बख्तियारपुर, अलौली, खगड़िया, बेलदौर और परबत्ता में सभी जगह 40 हजार से अधिक वोटों से पिछड़ गए थे। उनकी पार्टी मुजफ्फरपुर और मधुबनी में भी कुछ खास नहीं कर पाई। सिमरी-बख्तियारपुर में मुकेश सहनी को लोकसभा में जितने वोट मिले थे, उसका आधा वोट ही उनके प्रत्याशी को उप चुनाव में मिले।

लोकसभा चुनाव में वीआईपी जिन सीटों पर लड़ी वहां मुकेश सहनी की जाति के ठीक-ठाक वोट हैं। लेकिन उनकी जमात ने मुजफ्फरपुर में वीआईपी से अधिक तवज्जो अजय निषाद को दी। मधुबनी में भी कोई खास करामात उनकी पार्टी नहीं कर सकी। लोकसभा चुनाव में वीआईपी को 1.65% वोट मिले। यह 18 विधानसभा क्षेत्रों का ही हिसाब है, लेकिन वोट के मामले में अति-पिछड़ी गिनी जाने वाले और कई जातियों-उपजातियों में विभक्त निषाद समुदाय में कई क्षेत्रों में असरदार हैसियत रहता है। खासकर उत्तर बिहार में मुजफ्फरपुर से लेकर भागलपुर तक जहां नदियों का जाल है।



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