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जगदलपुर41 मिनट पहले

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  • शहर के गंगामुंडा तालाब और दलपतसागर में सुबह three बजे से पहुंचने लगी थीं व्रती महिलाएं

उदित होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही छठ व्रतियों द्वारा किया जा रहा 36 घंटे का निर्जला उपवास पूरा हो गया। इसके साथ ही छठ महापर्व के सभी विधान संपन्न कर लिए गए। शहर के गंगामुंडा और दलपत सागर के घाट पर तड़के three बजे से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। छठव्रती भी दउरा (बांस के टोकने) में प्रसाद के साथ घाट पर पहुंचे। लगभग 2 घंटे तक कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य के उदित होने की प्रतीक्षा करते रहे। सुबह सवा 6 बजे सूर्योदय होते ही भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित किया गया। अपनी मनोकामना पूरी होने पर कई श्रद्धालु दंडवत करते हुए छठ के घाट पर पहुंचे थे। सूर्योदय से पहले ही रुपए में फल और पूजन की सामग्री को सजा कर छठी मैया की पूजा अर्चना की गई। इसके अलावा बांस की टोकरी में ठेकुआ, चावल के लड्डू और कुछ फल लेकर लोटे में जल एवं दूध भरकर इसी से सूर्यदेव को ऊषा अर्घ्य दिया गया। इसके साथ ही प्रसाद व पूजन सामग्री के साथ पानी में खड़े छठ व्रती के हाथों में रखें सूप के सामने जल और दूध गिराते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया गया। मान्यता है कि छठ महापर्व के अंतिम दिन सूर्य की पत्नी उषा को अर्घ्य दिया जाता है। उगते सूर्य को अर्घ्य देकर लोग अपने परिवार सहित अन्य सभी के स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना की। इसके बाद वहां उपस्थित लोगों के बीच छठ का प्रसाद बांटा गया। कार्तिक शुक्ल सप्तमी शनिवार को उदित होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही four दिनों से चले आ रहे छठ महापर्व का समापन हो गया।



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