जगदलपुर6 घंटे पहले

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नारायणपुर में सर्वे अभियान के तहत घर-घर पहुंचकर जानकारी लेते कर्मचारी।

  • मेकॉज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में हो रही अध्ययन में खुलासा

मोहम्मद इमरान नेवी | कोरोनावायरस से लगातार हो रही मौतों और लोगों की बिगड़ती सेहत के बीच एक अच्छी खबर सामने आई है। मेकॉज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में हो रही अध्ययन में हुए खुलासे से पता चला है कि बस्तर में संक्रमित मिले ज्यादातर लोगों में पहले से 229-ई और एचकेयू-1 वायरस के इम्यून सेल एक्टिव थे। इसी कारण यहां कोविड-19 से संक्रमित होने वाले ज्यादातर लोग बिना लक्षण वाले और इस वायरस से लड़ने में सक्षम दिख रहे हैं।
माइक्राेबायोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी देबज्योति मजूमदार ने बताया कि हम अभी 229-ई और एचकेयू-1 वायरस से बनने वाले इम्यून सेल और कोविड-19 में इस इम्यून सेल की भूमिका पर काम कर रहे हैं। अभी तक की जांच में पता चला कि बस्तर में ज्यादातर लोगों में 229-ई और एचकेयू-1 वायरस ने बहुत पहले 2015 से 2018 ही अटैक किया था और इसके कारण बने इम्यून सेल के चलते कोविड-19 बस्तर में ज्यादा नुकसान नहीं पहुचा रहा है। ये 229-ई और एचकेयू-1 भी कोरोना वायरस का एक प्रकार है और इससे भी सर्दी-खांसी से निमोनिया तक जैसी बीमारी होती है। लोगों के शरीर में कोरोना से लड़ने के लिए जो इम्यून सेल डेवलप हुए वह इम्यून सेल अब कोविड-19 से लड़ने का काम कर रहे हैं।



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