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  • After 39 Days, Much less Than 100 Circumstances In The District, Paralyzed 34 Locations, Issues Will Enhance For Sufferers; four Sufferers Died, The Quantity Of Deaths Was Much less Than 5 For The Second Time In October

लुधियाना17 घंटे पहले

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जिले में कोरोना के केस घटने लगे हैं। मंगलवार को 102 केस आए। इसमें से लुधियाना के 85 और बाहरी जिलों-राज्यों से 17 मरीज शामिल हैं। 39 दिनों बाद जिले के संक्रमितों की संख्या 100 से कम रही है। इससे पहले 28 अगस्त को 107 पॉजिटिव केस आए थे। वहीं, 11 मरीजों की मौत हुई। इनमें से जिले के four मरीज शामिल हैं। मगर आने वाला समय कोरोना मरीजों के लिए मुश्किलों भरा हो सकता है।

इसके पीछे कारण ये है कि पंजाब सरकार और महकमे ने पराली प्रबंधन और इसे जलने से रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं। इस बार सूबे में 30.65 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बिजाई हुई है। इससे 220 लाख टन पराली होने की संभावना है। सरकार और महकमे की लापरवाही के चलते भारी मात्रा में पराली जलाई जा सकती है।

हालांकि 21 सितंबर से लेकर four अक्टूबर तक सूबे में 1206 पराली जलने की घटनाएं हो चुकी हैं। इससे सूबे में प्रदूषण स्तर फिर से बढ़ना शुरू हो गया है। वहीं, इस समय सूबे में एक्टिव कोरोना केस 11 हजार 982 हैं। साथ ही 274 मरीज ऑक्सीजन और 38 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। आने वाले दिनों में कोरोना के नए-पुराने मरीजों के साथ ही आम लोगों को भी सांस संबंधी दिक्कत आ सकती है।

पराली का धुआं कोरोना मरीजों की सेहत के लिए नुकसानदेह

अब तक अमृतसर में सबसे ज्यादा 686, तरनतारन में 259, पटियाला में 64, गुरदासपुर में 57, लुधियाना में 34 घटनाएं हो चुकी हैं। 2019 में कुल 55210 पराली जलाने की घटनाएं हुई थी। पीएयू के सॉइल साइंस डिपार्टमेंट के डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि पराली जलाने से मिट्टी पर प्रभाव पड़ता है और पर्यावरण को भी नुकसान होता है।

प्रति हेक्टेयर पराली खेतों में जलाने से 9090 किग्रा. कार्बन डाइऑक्साइड, 552 किग्रा. कार्बन मोनोऑक्साइड, 23.1 किलोग्राम नाइट्रस ऑक्साइड, 2.four किग्रा.सल्फर डाइऑक्साइड, 16.2 किग्रा. मिथेन और 94.2 किग्रा. अन्य हानिकारक गैसें निकलती हैं। इससे मरीजों की सेहत के अलावा पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है।

रिकवरी रेट 92.18%
जिले में अब तक 680 एक्टिव केस हैं और 784 मरीजों की मौत हो चुकी है। जिले का रिकवरी रेट 92.18% हो चुका है। एक्टिव केसों में 420 मरीज होम आइसोलेट हैं। 20 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। इनमें से 12 जिले के हैं।

पराली जली तो कोरोना के साथ गंभीर केसों में होगा इजाफा
अगर पराली जलती है तो कोविड केसों में बढ़ोतरी के अलावा गंभीर केस भी बढ़ेंगे, क्योंकि एक बीमारी पहले ही फेफड़ों को प्रभावित कर रही है। ऐसे में अगर पराली भी जली तो फेफड़ों पर दोहरा असर होगा, उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। अभी कई केसों में ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ रही, लेकिन बाद में ये भी बढ़ सकते हैं। -डॉ. आरके गोयल, मेंबर, इंडियन चेस्ट सोसाइटी

किसानों को कर रहे अवेयर, मशीनों पर सब्सिडी भी देंगे
पराली न जलाने के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। हम ये भी बता रहे हैं कि पराली जलाने से कोविड केसों में भी बढ़ावा होगा। मुआवजे की इस बार की राशि के बारे में अभी तक कोई घोषित नहीं हुई। पिछले साल के मुआवजे के बारे में कुछ नहीं कह सकते। -डॉ. स्वतंत्र कुमार एरी, डायरेक्टर एग्रीकल्चर

सरकार ने 2019 में भी छोटे किसानों को पराली न जलाने के एवज में मुआवजा देने की बात कही थी, जोकि नहीं मिला। इस बार के मुआवजे को लेकर कोई अधिकारी नहीं बता रहा। मशीनरी की कीमत इतनी है कि छोटा किसान नहीं ले सकता। हैप्पी सीडर सफल नहीं हुआ। सुपर सीडर किसानों को मिल नहीं रहा। इसे सब्सिडाइज्ड रेट पर नहीं दिया जा रहा। कंपनियों ने नवंबर में मशीन उपलब्ध करवाने की बात कही जा रही है, लेकिन तब तक बिजाई में देरी हो जाएगी। हर गांव या फार्मर ग्रुप को सरकार कम से कम 2 सुपर सीडर या फिर बेलर उपलब्ध कराए। -रुपिंदर सिंह, किसान

दो मृतक डायबिटीज से पीड़ित: मंगलवार को 11 पॉजिटिव मरीजों की मौत हुई। इसमें से लुधियाना के four और 7 बाहरी जिलों-राज्यों से जुड़े हैं। four मृतकों में सुसाइड की कोशिश करने वाले 43 वर्षीय व्यक्ति की भी मौत हुई। ये मरीज 29 सितंबर को डीएमसी में दाखिल हुआ था। इनकी रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई थी। खन्ना के 67 वर्षीय पुरुष, एसी मार्केट की 53 वर्षीय महिला और माधोपुरी की 90 वर्षीय महिला की मौत हुई। दो मरीज डायबिटीज, 1 हाइपरटेंशन और 1 आर्टरी डिजीज से पीड़ित रहे। वहीं, four हेल्थ केयर वर्करों की रिपोर्ट पॉजिटिव रही। इसके अलावा पॉजिटिव मरीजों के संपर्क के 12 मरीज, ओपीडी के 23, इनफ्लुएंजा लाइक इलनेस के 33, एसएआरआई के 1 मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव रही है।

सिर्फ सिविल में होगा कोरोना का इलाज: अब सिर्फ सिविल अस्पताल में ही इलाज होगा। इससे पहले जिला प्रशासन ने 2100 से बैड घटाकर 400 कर दिए थे। मगर अब सिर्फ सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वॉर्ड (150 लेवल-2 बैड्स) में ही इलाज होगा। ज्यादा मरीज सिविल अस्पताल में ही एडमिट हो रहे थे। इन्हीं आंकड़ों को देख ये फैसला लिया गया है। यूसीएचसी वर्धमान को अभी नॉन-कोविड अस्पताल घोषित किया गया है।



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