जालंधर7 घंटे पहले

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इन्हें सुरक्षित रखने का कोई प्रावधान नहीं… कार, बुलडोजर, ट्रक भी सड़ रहे

  • बेचा नहीं जा रहा, बस इकट्ठा किया जा रहा
  • केस में जब्त वाहन लोग लेने नहीं आते और इन्हें बेचने की प्रकिया काफी जटिल है

जालंधर पुलिस की तरफ से एनडीपीएस, आईपीसी और ट्रैफिक पुलिस की तरफ से जब्त वाहनों का कबाड़ दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। शहर के सभी थानों और पुलिस लाइन में कई सालों से पड़े लाखों के वाहन पड़े-पड़े सड़ रहे हैं। जालंधर पुलिस की तरफ से साल 2018 में कुल 76 वाहनों की ऑक्शन कर उन्हें बेचा गया था, लेकिन ज्यादातर वाहन अभी भी केस प्रापर्टी बने हुए हैं।

कबाड़ होने के बावजूद इन्हें डिस्पोज ऑफ या नीलाम नहीं किया जा रहा है। क्योंकि, इसकी प्रकिया काफी जटिल होती है। पुलिस लाइन के अंदर चेतक स्कूटर, लिमोजीन, मोडिफाई हमर, 300 से ज्यादा मोटरसाइकिल, मोडिफाई हमर, मिनी लिमोजिन और ट्रक व रोड रोलर भी पड़े हैं, जो सालों से खड़े-खड़े ही कबाड़ बन चुके हैं।

पुलिस की तरफ से इन्हें पूरी तरह से सुरक्षित रखने के लिए कोई उचित प्रावधान नहीं किया गया है। वहीं सीनियर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वाहनों को बेचने की तैयारी चल रही है और उम्मीद है कि हाईकोर्ट की परमिशन के बाद इन्हें बेचा जाएगा।

थानों में वाहनों को सुरक्षित रखने के नहीं प्रबंध

शहर के सभी थानों और पुलिस लाइन में अब तक three हजार से ज्यादा वाहन एनडीपीएस, आईपीसी व अन्य केस प्रापर्टी के तहत पकड़े गए हैं। पुलिस के पास इन वाहनों को सुरक्षित रखने के लिए भी उचित प्रबंध नहीं है और वाहन खुले में ही बरसात और धूप में खड़े रहकर कबाड़ बन चुके है। शहर के सभी थानों में इस समय 2493 टू व्हीलर, 122 थ्री व्हीलर, 414 फोर व्हीलर, 19 अन्य सहित कुल 3048 वाहन शामिल है।

साल 2018 में 76 वाहनों से 9 लाख की आमदनी

जालंधर पुलिस की तरफ से आखिरी बार साल 2018 में एनडीपीएस एक्ट में पकड़े वाहन जो कबाड़ बन चुके है उनकी ऑक्शन करवाई गई थी। पुलिस ने अलग-अलग 75 केसों में 61 टू व्हीलर, 1 थ्री व्हीलर, 13 फोर व्हीलर, सहित कुल 76 व्हीकल की ऑक्शन करते हुए 9,53,143 लाख रुपए में बेचे थे।



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