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  • 160 web page E-book On The Life And Philosophy Of Baba Banda Singh Bahadur, The Commando Of The Sikh Warrior And Khalsa Military Launched.

चंडीगढ़39 मिनट पहले

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कृष्ण कुमार बावा ने कहा कि उनकी मांग ये है कि बाबा बंदा सिंह बहादुर की शहीदी दिल्ली और उनका जन्म जम्मू एंड कश्मीर में हुआ है। इसलिए वे चाहते हैं कि दिल्ली टू एक्सप्रेस वे का नाम बाबा बंदा सिंह बहादुर के नाम से रखा जाए। (फोटो- जसविंदर सिंह).

  • बाबा बंदा सिंह बहादुर इंटरनेशनल फाउंडेशन की ओर से इस किताब को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में विमोचित किया गया

(आरती एम अग्निहोत्री). सिख वॉरियर और खालसा आर्मी के कमांडो बाबा बंदा सिंह बहादुर भक्ति और शक्ति के सम्मिलित थे। उन्होंने न सिर्फ मुगलों के अजित होने के भ्रम को तोड़ा था,बल्कि उन्होंने किसानों को उनकी जमीन का मालिकाना हक भी दिलाया। इसलिए आज के युग में ये और भी जरूरी हो जाता है कि युवा और आने वाली पीढ़ियां उनके बारे में जानें। इसी मकसद से बाबा बंदा सिंह बहादुर के जीवन और फिलॉस्फी पर चंडीगढ़ प्रेस क्लब में एक किताब का विमोचन किया गया है। बाबा बंदा सिंह बहादुर इंटरनेशनल फाउंडेशन की ओर से इसे विमोचित किया गया।

फाउंडेशन के प्रेजिडेंट कृष्ण कुमार बावा ने बताया कि उन्होंने साल 1989 में लुधियाना में बाबा बंदा सिंह बहादुर का एक समागम किया था। तब हैरानी ये जानकर हुई थी कि पानीपत की हारी हुई तीन लड़ाई का जिक्र तो स्कूल के बच्चों के सिलेबस में है और सिख इतिहास में जिस शख्सियत ने इतनी अहम भूमिका निभाई थी,उसका जिक्र कहीं भी नहीं। बस इसके बाद अपनी फाउंडेशन पर काम किया और अब न सिर्फ भारत बल्कि अन्य देशों में हमारी फाउंडेशन की प्रेजेंस है। हर जगह बाबा बंदा सिंह बहादुर के जन्म और शहीदी दिवस पर यहां समागम होते हैं।

कृष्ण कुमार बावा ने बताया कि कोविड 19 के दौरान करीब डेढ़ महीना पहले बाबा बंदा सिंह बहादुर के सब्जेक्ट पर एक वेबीनार हुआ था जिसमें कई देशों के लोगों ने पार्टिसिपेट किया था। जिन वक्ताओं ने उस चार घंटे के वेबीनार में हिस्सा लिया था,उन सब ने मिलकर ही 160 पन्नों की इस किताब को अंजाम दिया है। ज्यादातर चैप्टर पंजाबी और कुछ एक अंग्रेजी भाषा में हैं। 144 पन्नों में उनके बारे में बताया गया है जबकि बाकी के 16 पन्नों में बावा बंदा सिंह बहादुर के समागमों की तस्वीरों को लगाया गया है।

कृष्ण कुमार बावा ने कहा कि उनकी मांग ये है कि बाबा बंदा सिंह बहादुर की शहीदी दिल्ली और उनका जन्म जम्मू एंड कश्मीर में हुआ है। इसलिए वे चाहते हैं कि दिल्ली टू एक्सप्रेस वे का नाम बाबा बंदा सिंह बहादुर के नाम से रखा जाए। वहीं बैरागी महामंडल पंजाब के रविंदर नंदी बावा और बाबा बंदा सिंह बहादुर इंटरनेशनल फाउंडेशन के नेशनल जनरल सेक्रेटरी रविंदर नंदी ने बताया कि उनकी फाउंडेशन ने लुधियाना के पास गांव रकवा में बाबा बंदा बहादुर भवन और शब्द प्रकाश के नाम से एक गैलरी बनाई हुई है। यहां उन 6 गुरुओं, 15 भक्तों, 11 भट्‌टों और चार गुरसिखों की तस्वीरें और उनके बारे में बताया गया है जिनकी बाणी गुरू ग्रंथ साहिब में दर्ज हैं।



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