रोहतक2 घंटे पहले

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मांगाें काे लेकर नारेबाजी कर प्रदर्शन करते एमडीयू में गैर शिक्षक कर्मचारी।

  • एमडीयू के गैर शिक्षकों व शिक्षक संघ ने वेतन के लिए दिया धरना, आज लेंगे हड़ताल पर फैसला
  • दो दिन का दिया समय, कोई समाधान न निकलने पर बुधवार को प्रशासनिक भवन के सामने बैठक बुलाएंगे

प्रदेश सरकार की ओर से मिलने वाली 50 करोड़ की राशि न आने से एमडीयू के शिक्षकों व गैर शिक्षकों के वेतन अटक गए हैं। इसके चलते लगातार दूसरे दिन भी कर्मचारी विरोध में रहे और सुबह गेट मीटिंग कर प्रशासनिक भवन के सामने धरना दिया। इस दौरान एमडीयू के गैर शिक्षकों व शिक्षक संघ ने मंगलवार को एमडीयू प्रशासनिक भवन के सामने धरना दिया। इससे पहले कर्मचारियों ने प्रशासनिक भवन की सभी शाखाओं मे जाकर नारेबाजी कर विरोध भी जताया।

पदाधिकारियों का कहना है कि अधिकारियों की ओर से उन्हें दो दिन का समय दिया गया है, लेकिन हल नहीं होता है तो वे बड़ा आंदोलन भी करेंगे। अब बुधवार को फिर से सुबह प्रशासनिक भवन के सामने बैठक बुलाई जाएगी। इस दौरान ही हड़ताल पर फैसला लिया जाएगा। इस अवसर पर एमडीयू शिक्षक संघ के प्रधान डॉ. विकास सिवाच, गैर शिक्षकों के प्रधान कुलवंत मलिक, पूर्व प्रधान निरंजन सिंह, फूल कुमार बोहत, रणधीर सिंह कटारिया व सुमेर सिंह, राजकुमार शर्मा, महासचिव सुरेश कौशिक व अन्य भी मौजूद रहे।

16 से हड़ताल की दी चेतावनी
वहीं हेल्थ विश्वविद्यालय के शिक्षक और गैर शिक्षकों को भी वेतन नहीं मिल पाया है। कोरोना काल में पहले से आर्थिक तैयारियां ना करने के चलते प्रदेश के दो राज्य विश्वविद्यालय के पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने तक के पैसे नहीं है। इसके चलते अब दोनों संस्थानों के 4500 कर्मचारी विरोध की राह पर है। वहीं हेल्थ विश्वविद्यालय एवं पीजीआईएमएस के भी कर्मचारियों ने हेल्थ विवि के प्रशासन को चेतावनी दी है कि 15 अक्टूबर तक यदि कर्मचारियों का वेतन नहीं मिलता तो 16 अक्टूबर से पीजीआईएमएस के कर्मचारी विजय पार्क में हड़ताल पर चले जाएंगे। वहीं दोनों ही संस्थानों की एसोसिएशन ने अपने अधिकारियों से मुलाकात की तो अब चंडीगढ़ में अधिकारियों से वार्तालाप करने का आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन समाधान होता अभी नजर नहीं आ रहा।

एसएफआई ने भी दिया समर्थन
एसएफआई जिला प्रधान अर्जुन ने बताया कि प्रदेश के नंबर वन विश्वविद्यालय को सरकार खत्म करने का काम कर रही है। कोरोना काल के दौरान भी शिक्षक और गैर शिक्षक कर्मचारियों ने मिलकर एमडीयू के हर काम को आगे बढ़ाया है। अब स्थिति ऐसी है कि इन लोगों को समय पर वेतन भी नहीं दिया जा रहा है। हरियाणा के सभी विश्वविद्यालय में भी यही हाल है। वेतन समय पर जारी नहीं हो रहा है। इसी कड़ी में एसएफआई जिला सचिव प्रवीन ने बताया कि अगर इन शिक्षकों और गैर शिक्षकों कि मांगों का समाधान नहीं किया तो एसएफआई विद्यार्थियों को लामबन्द करते हुए आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

यूं समझें एमडीयू के बजट का हाल
एमडीयू गैर शिक्षक संघ के महासचिव सुरेश कौशिक के मुताबिक एमडीयू को हर साल करीब 70-80 करोड़ रुपए दाखिला, रजिस्ट्रेशन और तमाम कॉलेजों से फीस का हिस्सा मिलता है। इसके अलावा इस बार मार्च में 103 करोड़ रुपए का बजट प्रदेश सरकार ने पास किया। इसमें से 50 करोड़ प्लान के तहत और 53 करोड़ नॉन प्लान का बजट शामिल था। इस बार काेरोना काल में आर्थिक तंगी के चलते सरकार की ओर से 50 करोड़ रुपए की राशि जारी नहीं की गई, जबकि इसे मंजूरी मिल चुकी थी। वहीं कोरोना के चलते इस बार कॉलेज बंद होने और दाखिला प्रक्रिया देरी से शुरू होने के चलते राशि एमडीयू में नहीं पहुंची, जिससे इस तरह का संकट खड़ा हो गया। हर महीने एमडीयू के शिक्षक व गैर शिक्षकों को वेतन के तौर पर 12 करोड़ रुपए जाते हैं। इसके अलावा ठेके पर लगे अनुबंधित कर्मचारियों को करीब four करोड़ रुपए का खर्च वेतन व अन्य खर्च के तौर पर होता है। जबकि इस बार एमडीयू के खाते में दाखिला प्रक्रिया से अब तक 10 करोड़ रुपए ही एकत्र हो पाए हैं, जोकि वेतन के लिए भी पर्याप्त नहीं है। जबकि अन्य खर्च भी काफी हैं।



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